Adhoora Kissa (Unfinished Chapter)

यह कैसा ग़म है
आँख नमी गला सूखा
तुझसे दूर जितना भागूँ
उतना ही क़रीब आती हूँ मैं
तुझे भूलने की कोशिश में
और अपना बना देती हूँ मैं
तुझसे नाराज़ होकर
अपने को सज़ा देती हूँ मैं
तुम हो क्या पराये
या मेरे ही प्रतिबिम्ब
यह सोचके
दंग रह जाती हूँ मैं
यह कैसा रिश्ता है
न कोयी बंदन न कोयी वादा
खोयी हुयी कोयी
पिछले जनम का नाता
यह कैसा ग़म है
दम घुटती मगर जान नहीं छूटती
जैसे गले में टपक गया हो
जीवन का कोयी
अधूरा किस्सा

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